प्रेमी जोड़ों के लिए 24X7 हेल्पलाइन, शादी और सालभर रहने का जिम्मा प्रशासन का

ऑनर किलिंग
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प्रेमी जोड़ों के लिए 24X7 हेल्पलाइन, शादी और सालभर रहने का जिम्मा प्रशासन का 

ऑनर किलिंग : –  ऑनर किलिंग रोकने को सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस जारी, 6 हफ्ते में करना होगा अमल, कानून बनने तक रहेंगी लागू  I
ऑनर किलिंग रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को गाइडलाइंस जारी कीं। इन पर केंद्र सरकार और सभी राज्यों को छह हफ्ते के अंदर अमल करना होगा। गाइडलाइंस के तहत हर जिले में प्रेमी जोड़ों के लिए चौबीसों घंटे खुली रहने वाली हेल्पलाइन शुरू होगी। जिला पुलिस और प्रशासन वयस्क जोड़ों की शादी में मदद करेंगे। एक महीने से लेकर एक साल तक कम से कम खर्च पर सुरक्षित जगह पर उनके रहने का इंतजाम भी किया जाएगा। साथ ही कोर्ट ने ऑनर किलिंग के मामलों का ट्रायल फास्ट ट्रैक कोर्ट में रोजमर्रा के आधार पर करने का आदेश दिया। ट्रायल 6 माह में खत्म करना ही होगा। यह गाइडलाइंस तब तक लागू रहेंगी, जब तक सरकार इस मुद्दे पर कोई कानून नहीं बनाती। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने शक्ति वाहिनी नाम के एनजीओ की याचिका पर यह गाइडलाइंस जारी की हैं।

तीन भागों में हैं सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस, कानून बनने तक लागू रहेगी ऐसे बरतें एहतियात :- 

*पिछले पांच साल में जिन जिलों व गांवों में ऑनर किलिंग या खाप की बैठकें हुई हैं, उन्हें चिह्नित करें। अंतरजातीय, समगोत्र और दूसरे धर्म में हो चुकी शादियाें को संवेदनशीलता से देखें।

*पुलिस ऐसी बैठक रोकने के लिए लोगों को समझाए। जरूरत पड़े तो फोर्स तैनात करें। डीसीपी सुनिश्चित करेगा कि बैठक में प्रेमी जोड़े या परिवार को हानि पहुंचाने का निर्णय न हो। ऐसा हो तो बैठक बुलाने वाले पर कार्रवाई की जाए।
*भीड़ प्रेमी जोड़े और परिवार को नुकसान पहुंचाती दिखे तो डीएसपी जिला मजिस्ट्रेट से इन्हें रोकने के लिए प्रशासनिक आदेश मांगें।
*गृह मंत्रालय राज्यों के साथ मिलकर ऐसे मामलों में बचाव संबंधी उचित कदम उठाए। राज्यों के बीच को-ऑर्डिनेशन के लिए मेकेनिज्म तैयार किया जाए।

*पुलिस: लापरवाही पर संबंधित अधिकारी पर विभागीय कार्रवाई होगी। कार्रवाई छह महीने से अधिक नहीं होगी। सूचना के बावजूद किसी अधिकारी ने समूह को नहीं रोका या अपराधियों को

नहीं पकड़ा तो उस पर कार्रवाई होगी। खाप पंचायत के खिलाफ सबूत नहीं हालांकि, कोर्ट ने फैसले में कहा कि एसा कोई सबूत नहीं मिला है, जिससे पता चले कि खाप पंचायत ऑनर किलिंग की जिम्मेदार हैं।
लापरवाही पर यह सजा ऐसे करें रोकथाम :-
*प्रेमी जोड़े के खिलाफ बैठक की सूचना मिलते ही आईपीसी की धारा 141, 143, 503 और 506 के तहत केस दर्ज किया जाए। एसपी/डीएसपी कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।

*शादी कर चुके या करने वाले जोड़ों और उनके परिवार को जिला मजिस्ट्रेट या एसपी निगरानी में सुरक्षा दी जाएगी। सेफ हाउस में ठहराया जाएगा।

*जिला मजिस्ट्रेट और एसपी संवेदनशील रहें। जोड़ा चाहे तो पुलिस सुरक्षा में राज्य से बाहर सुरक्षित जगह पर पहुचाएं।

*धमकी के मामलों में जांच एएसपी स्तर का अधिकारी करेगा। एक हफ्ते में एसपी को रिपोर्ट देगा। इस पर एसपी एफआईआर का आदेश देगा। खाप की बैठक में शामिल रहे लोगों पर डीएसपी आपराधिक षड्यंत्र के आरोप में केस दर्ज करेगा।

*खाप या एेसे अन्य समूूह की बैठकों पर शुरू से ही रखी जाएगी नजर, समझाने पर नहीं माने तो फोर्स का होगा इस्तेमाल I
ऑनर किलिंग रोकने को मप्र, बिहार और हिमाचल की तारीफ :-

*मध्यप्रदेश  ऑनर किलिंग रोकने के लिए क्राइम अंगेस्ट वुमेन सेल है। आईजी स्तर का अधिकारी प्रेमी जोड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
*बिहार  अंतरजातीय विवाह को प्रोत्साहन देने के लिए 25 हजार रुपए की आर्थिक सहायता शुरू की गई है।
*हिमाचल प्रदेश  राज्य सरकार के प्रयासों की वजह से यहां कोई खाप पंचायत या पंचायत नहीं है। 10 साल में ऑनर किलिंग का एक भी केस दर्ज नहीं हुआ है।
राजस्थान सहित इन राज्यों में सबसे अधिक :-सुप्रीम कोर्ट ने एनसीआरबी की एक रिपोर्ट के हवाले से कहा कि भारत में ऑनर किलिंग हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, यूपी, बिहार के भागलपुर जिला, दिल्ली और तमिलनाडु में अधिक होती हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने बताया- दुनियाभर में होती है ऑनर किलिंग :-सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में यूएन में वर्ष 2002 में पेश एक रिपोर्ट के हवाले से कहा कि ऑनर किलिंग भारत ही नहीं विदेशों में भी होती हैं। जॉर्डन, पाक, मोरक्को, यूएई, तुर्की, यमन, पर्शियन गल्फ कंट्री, फ्रांस, जर्मनी, इंग्लैंड, बांग्लादेश, इक्वाडोर, इजरायल, इटली, स्वीडन और युगांडा इनमें शामिल हैं।

देश में 3 साल में 288 ऑनर किलिंग 

चीफ जस्टिस ने कहा- स्वतंत्रता का अर्थ है अपनी पसंद के अनुसार चुनाव की आजादी :- सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कई महान दार्शनिकों व विचारकों की टिप्पणियां भी जोड़ी हैं। चीफ जस्टिस ने फ्रांसीसी दार्शनिक सिमोने वेल की पंक्तियां पढ़ते हुए कहा, अनुछेद 147 स्वतंत्रता ऐसा शब्द है, जिसका ठोस अर्थ चयन करने की क्षमता से है।’ उन्होंने कहा कि जब जीवनसाथी चुनने की हमारी स्वतंत्रता को सम्मान के नाम पर कुचला जाता है तो समाज पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। क्या परिवार के बड़ों या किसी कबीले को ऐसा करने की अनुमति दे सकते हैं कि वह मर्जी से शादी करने वालों की सम्मान के नाम पर जान ले लें? ऐसे असंवैधानिक व्यवहार की अनुमति नहीं है।

 

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