अपनी मर्जी से कोर्ट में शादी के इच्छुक जोड़े के घर ना चिपकाए जाएं नोटिस : राजस्थान हाईकोर्ट ने विवाह अधिकारियों को निर्देश दिया

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अपनी मर्जी से कोर्ट में शादी के इच्छुक जोड़े के घर ना चिपकाए जाएं नोटिस : राजस्थान हाईकोर्ट ने विवाह अधिकारियों को निर्देश दिया : 

राजस्थान उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने राज्य में सभी विवाह अधिकारियों को निर्देश दिया है कि विशेष विवाह अधिनियम, 1954  के तहत  विवाह करने को इच्छुक जोड़े के निवास पर नोटिस ना भेजे जाएं।

दरअसल कुलदीप सिंह मीणा ने संबंधित पुलिस स्टेशन के एसएचओ के माध्यम से जोड़े के  निवास पर विवाह के नोटिस को चिपकाने की विवाह अधिकारियों द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया की वैधता को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की थी। मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नंदराजोग  की अध्यक्षता वाली पीठ ने  दिल्ली उच्च न्यायालय की एकल पीठ के  प्रणव कुमार मिश्रा और अन्य बनाम दिल्ली सरकार में फैसले से सहमति जताई।

मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नंदराजोग  की अध्यक्षता वाली पीठ ने  दिल्ली उच्च न्यायालय की एकल पीठ के  प्रणव कुमार मिश्रा और अन्य बनाम दिल्ली सरकार में फैसले से सहमति जताई। उन्होंने कहा कि पक्षकारों के निवास पर नोटिस चिपकाने की प्रक्रिया की कोई जरूरत नहीं और ना ही ये कानून द्वारा अधिकृत है। यह व्यक्तियों की गोपनीयता का उल्लंघन होगा।

इस निर्णय में जस्टिस रविंद्र भट्ट ने कहा था: “यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि विशेष विवाह अधिनियम किसी भी भारतीय नागरिक को विवाह के विशेष रूप को सक्षम करने, विभिन्न धर्मों को स्वीकार करने या शादी की इच्छा के लिए बनाया गया था।  वैवाहिक योजनाओं के अनुचित प्रकटीकरण विवाह के हकदार दो वयस्कों, कुछ स्थितियों में, विवाह को खतरे में डाल सकता है।  कुछ मामलों में यह माता-पिता के हस्तक्षेप के कारण दोनों पक्ष के जीवन या अंग को भी खतरे में डाल सकता है। “

पीठ ने कहा कि वह दिल्ली उच्च न्यायालय की एकल पीठ के तर्क के साथ सहमत है।

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  1. legalfreedom says:

    yoto

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